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मथुरा के जवाहर बाग में हुआ था खूनी संघर्ष

मथुरा। दो साल पहले 2 जून को मथुरा के जवाहर बाग में खूनी संघर्ष हुआ था। आध्यात्म गुरु राम वृक्ष यादव के अनुयायियों ने मिलकर मौत का तांडव मचाया था। उस हिंसा में यूपी पुलिस ने एसपी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार यादव के रूप में दो बेहतरीन अफसर खो दिए थे। हिंसा करने वाले रामवृक्ष यादव भी नहीं बचे थे। आग ठंडी होने के बाद राख में लाल चूड़ियां और बच्चों की कुछ बची हुई किताबें मिली थीं।
गाजीपुर के रायपुर बागपुर गांव का रहनेवाला रामवृक्ष बाबा जय गुरुदेव का अनुयायी था। वो उनकी दूरदर्शी पार्टी से जुड़ा हुआ था। हालांकि, धीरे-धीरे उसके बाबा जय गुरुदेव से रिश्ते बिगड़ने लगे। 2014 में रामवृक्ष अपना गांव छोड़कर मथुरा के जवाहरबाग में आकर बस गया था। गांव में उसकी पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां थीं।
गांव छोड़ने के बाद रामवृक्ष ने अपने खुद के चेलों के साथ मिलकर मथुरा के जवाहरबाग में डेरा डाल दिया था। लगभग 260 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा जमा रखा था। वो अपने फॉलोअर्स को सरकारी जमीन पर घर बनवाकर देने का वादा किया करता था। एक रुपए लीटर में पेट्रोल‑डीजल देने, 12 रुपए तोला सोना और गोल्ड करंसी चलाने जैसी अजीब मांगें रखते हुए मध्य प्रदेश के सागर से 2014 में अभियान शुरू किया। अपने फॉलोवर्स को उसने पुलिस से लड़ने के लिए गोरिल्ला ट्रेनिंग दी थी। ग्रुप में ट्रेन्ड तलवारबाज, शार्पशूटर आदि मौजूद थे।
2 जून 2016। शाम के लगभग 5 बजे पुलिस टीम जवाहर बाग पहुंची थी। लगभग एक महीने पहले से रामवृक्ष द्वारा कब्जा किए क्षेत्र का बिजली-पानी कट कर दिया गया था, जिससे वह कमजोर पड़ जाए। जैसे ही पुलिस अंदर घुसी, रामवृक्ष के लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। उन्हें कंट्रोल करने के लिए आंसूगैस और रबर बुलेट्स फायर किए गए, लेकिन अनुयायियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। रामवृक्ष के अनुयायियों ने एसपी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार यादव को डंडों से पीटकर मार डाला। अपने अफसरों पर हुए अटैक से गुस्साई पुलिस फोर्स ने हमले तेज कर दिए। ‑वेब