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फूड पार्क को लेकर हुई बहस

लखनऊ। पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण की एक ट्वीट से शुरू हुई फूड पार्क को लेकर बहस सीएस योगी आदित्यनाथ के फोन कॉल के बाद थम गई। बालकृष्ण ने ट्वीट किया था कि वे यूपी सरकार के रवैये से परेशान होकर ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित पतंजलि फूड पार्क को शिफ्ट कर रहे हैं। इसके बाद योगी ने बाबा रामदेव को कॉल कर प्रॉजेक्ट 12 जून तक फाइनल करने का आश्वासन दिया। दो साल पहले अखिलेश यादव द्वारा शिलान्यास किया गया यह फूड पार्क देश का सबसे महंगा फूड पार्क होगा।
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि का यह दूसरा फूड पार्क है। ग्रेटर नोएडा से पहले हरिद्वार में उनका यूनिट काम कर रहा है। साल 2016 में शिलान्यास के वक्त इस फूड पार्क प्रॉजेक्ट की कॉस्ट 16 हजार करोड़ रुपए बताई गई थी। हालांकि, मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रॉसेसिंग इंडस्ट्रीज की ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट की कॉस्ट 256.17 करोड़ रुपए है।
ये फूड पार्क क्षेत्र के किसानों को बिना बिचैलियों के फूड प्रॉसेसिंग कंपनी और कंज्यूमर्स से कनेक्ट करते हैं। फूड पार्क खोलने वाली कंपनी किसानों को सिस्टमैटिक तरीके से फार्मिंग करवाती है, जिससे डायरेक्ट किसानों तक फायदा पहुंचता है। ये कंपनियां किसानों से सब्जी, फल, दूध खरीदकर उन्हें प्रॉसेस कर सॉस, फ्रोजन फूड और डेरी प्रॉडक्ट्स के रूप में बेचती है। किसानों को फूड पार्क में शामिल करने से उन्हें मंडियों और दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। सरकारी मानकों के मुताबिक हर मेगा फूड पार्क को मिनिमम 25 हजार किसानों को जोड़ना होता है। सरकार फूड पार्क ओपन करने वाली कंपनी को 50 करोड़ रुपए तक की ग्रांट भी देती है। ‑वेब