विदेश

सेना ही तय करती है पाकिस्तान की राजनीति

चुनाव परिणामों से साफ है कि पीएमएल-एन या पीपीपी को जनता ने नकार दिया है और पाकिस्तान का नया वजीर आजम इन दोनों दलों से कोई चेहरा नहीं होगा। ऐसे में सवाल है कि जो नई सरकार बनेगी क्या वो इन्हीं दलों के नक्शेकदम पर चलेगी या कोई व्यापक बदलाव कर सकेगी।
इस्लामाबादः अब करीब करीब ये तय हो चुका है कि पाकिस्तान का अगला वजीर आजम कौन होगा। इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान तहरीक‑ए-इंसाफ बहुमत के करीब है। पाकिस्तान की सियासत में दो पार्टियों खासतौर से पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और पीएमएल-एन का दबदबा रहा है। इसके साथ ऐतिहासिक सच ये भी रहा है कि इस्लामाबाद पर भले ही किसी दल ने अपना झंडा गाड़ा हो विदेश नीति के मोर्चे पर पाकिस्तान सेना हमेशा से असर डालती रही है। आखिर सवाल ये है कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकारें विदेश नीति के मोर्चे पर हथियार क्यों डाल देती हैं। क्या इमरान खान इस ऐतिहासिक सच को झुठला सकेंगे या वो खुद विदेश और रक्षा नीति के मुद्दे पर पाक सेना के दबाव का सामना करते रहेंगे। ‑वेब