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करुणानिधि की पार्थिव देह को चेन्नई की मरीना बीच पर दफनाया गया

पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि की पार्थिव देह को उनके राजनीतिक गुरु अन्नादुराई के समीप दफनाया गया है. अंतिम संस्कार से पहले मरीना बीच के लिए राजाजी हॉल से उनकी शवयात्रा निकाली गई जिसमें लाखों की तादाद में लोग शामिल हुए. समर्थकों ने नम आंखों से अपने कलैगनार को अंतिम विदाई दी.
करुणानिधि के अंतिम संस्कार में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राजनेता शामिल हुए थे. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, माकपा महासचिव प्रकाश करात, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत कई अन्य नेताओं ने करूणानिधि को श्रद्धांजलि अर्पित की.
तमिल फिल्म जगत के लोगों ने भी इस दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. पेरियार ई वी रामास्वामी के निधन के बाद तब करूणानिधि द्वारा लिखी गई एक कविता को संवाददाताओं के सामने उद्धृत करते वक्त लेखक और गीतकार वैरामुथु रो पड़े. उन्होंने कहा, ‘‘क्या हम ताजमहल के विध्वंस को सिर्फ इसलिए स्वीकार कर सकते हैं कि उसकी संरचना पुरानी हो चुकी है ? वही जो करूणानिधि ने पेरियार के निधन पर लिखा था, हम इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि कलाईंगनार अब नहीं रहें.’’
बुधवार सुबह ही मद्रास हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने उनका अंतिम संस्कार मरीना बीच पर करने की इजाजत दे दी थी. हाईकोर्ट का यह फैसला सुनते ही राजाजी हॉल के बाहर जमे हजारों डीएमके में खुशी की लहर दौड़ पड़ी, वहीं करुणानिधि के बेटे और उनके सियासी वारिस स्टालिन की आंखों से आंसू छलक आएं.
राजाजी हॉल के बाहर पार्टी समर्थकों का भारी हुजूम लगा रहा, जो किसी भी तरह दर्शन को आतुर थे. इस दौरान पुलिस को भीड़ पर काबू के लिए लाठीचार्ज भी करना पड़ा, इस दौरान मची भगदड़ में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 26 लोग घायल हुए है। डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की. स्टालिन ने इसके साथ कहा, ’पुलिस हमें सुरक्षा दे या नहीं, लेकिन मैं आपके पैर पकड़कर विनती और विनर्म निवेदन करता हूं कि शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए धीरे-धीरे यहां से हट जाएं.’ ‑वेब