लखनऊ

विवेक हत्याकांडः गोली लगने के बाद भी पुलिस ने बरती लापरवाही

एप्पल सेल्स एग्जीक्यूटिव विवेक तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गोली लगने के 55 मिनट बाद तक उनकी सांस चल रही थी, लेकिन पुलिस इस दौरान उन्हें समुचित उपचार मुहैया नहीं करवा पाई।
चश्मदीद सना खान के मुताबिक, ’गोली लगने के बाद तिवारी ने करीब 300 मीटर तक गाड़ी चलाई थी। उसके बाद गाड़ी एक पिलर से टकरा गई। आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी और उसके साथी सिपाही संदीप कुमार उसके बाद वहां से फरार हो गए थे।’ सना ने यह बयान पुलिस को भी दिया है और मीडिया से बातचीत के दौरान भी कही।
कुछ समय बाद दूसरा पुलिस गश्ती दल पहुंचा और उन्होंने एंबुलेंस बुलाने के लिए कॉल करना शुरू किया। सना ने बताया कि जब पुलिस से उन्हें एंबुलेंस का इंतजार न करके जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए अपील की, तो विवेक को पुलिस ने अपनी गाड़ी में डाला और राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद भी पुलिस तिवारी के इलाज पर ध्यान देने की बजाय सना के बयान दर्ज करने में बिजी रही।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गोली लगने के 35 मिनट बाद तिवारी को अस्पताल में तड़के करीब 2.05 बजे भर्ती कराया गया था। इसके बाद 2.25 बजे तिवारी की मौत हो गई। वैसे घटनास्थल से राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचने में दस मिनट से भी कम समय लगता है। रिपोर्ट के मुताबिक तिवारी को ठुड्डी की बायीं तरफ गोली लगी थी। गोली लगने से उनके दाएं तरफ का जबड़ा टूट गया था और गोली उनकी गर्दन में मिली है। इसके साथ ही बताया गया कि उन्हें गोली सामने से ऊंचाई पर खड़े होकर मारी गई है। ‑वेब