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पिता मुलायम को दरकिनार करने का खामयाजा भुगता अखिलेश ने

नई दिल्ली। सपा-बसपा और आरएलडी गठबंधन मोदी के आगे पूरी तरह से धराशायी हो गया. उ0प्र0 में सपा को जहां मात्र 5 सीटें आई हैं वहीं बीएसपी को 10 सीटें मिली हैं. आरएलडी अपना खाता खोलने में नाकाम रही है. वहीं 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सिर्फ 1 ही सीट (रायबरेली में सोनिया गांधी) आई हैं. अमेठी से राहुल गांधी भी स्मृति ईरानी से हार गए हैं. लेकिन सबसे बड़ा झटका अखिलेश यादव को लगा है. ऐसा लग रहा है कि बीएसपी से आधी सीटों पर समझौता करने वाली समाजवादी पार्टी के खाते में मायावती की पार्टी का वोट बिलकुल ट्रांसफर नहीं हुआ है. वहीं बीते चुनाव में एक भी सीट नहीं जीतने वाली बीएसपी को इस बार 10 सीटें आई हैं. माने इस समझौते से बीएसपी को इस गठबंधन से सपा से ज्यादा फायदा हुआ है. वहीं कन्नौज से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल तक अपनी सीट नहीं बचा पाई. यहां एक बात ध्यान देने वाली यह है कि पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते थे कि सपा बसपा का गठबंधन हो. उत्तर प्रदेश की राजनीति को जमीन से समझने वाले मुलायम सिंह यादव हकीकत पहले ही भांप गए थे. दरअसल उत्तर प्रदेश में दोनों ही पार्टियां एक तरह से मुख्य प्रतिद्वंदी रही हैं. जातिगत राजनीति करने वाली इन दोनों पार्टियों का कॉडर भी एक दूसरे को पसंद नहीं करता था. लेकिन अखिलेश को लगता था कि सपा और बसपा का वोट बैंक मिलकर बीजेपी को पीछे छोड़ सकता है. हालांकि उनका यह अंदाजा काफी हद तक गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में सही साबित हुआ था. लेकिन लोकसभा चुनाव में अनुभवी मुलायम सिंह का अंदाजा सही साबित हुआ. ‑वेब