लखनऊ

कमलेश तिवारी को मौत के घाट उतारने वाले दोनों हत्यारे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कमलेश तिवारी हत्याकांड को लेकर यूपी पुलिस ने दिनरात एक कर दिया है फिर भी अभी उनके हाथ कोई बड़ी सफलता नहीं लग पाई है. पुलिस ने इस साजिश का पर्दाफाश तो कर दिया है लेकिन कमलेश को मौत के घाट उतारने वाले दोनों हत्यारे अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. सीसीटीवी और मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस को पता चला है कि दोनों की लोकेशन दिल्ली में है. ऐसे में यूपी पुलिस की टीम दिल्ली, लखनऊ, सूरत समेत कई शहरों लगातार छापेमारी कर रही हैं.
यूपी के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया है कि साल 2015 में पैगम्बर मोहम्मद पर आपत्तिजनक बयान के कारण हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश की हत्या की साजिश रची गई थी. जानें इस मामले में अबतक क्या कुछ हुआ है.
ओ पी सिंह ने बताया है कि इस वारदात में दो और आरोपी शामिल हैं, जिनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. उन्होंने बताया कि तिवारी के परिजनों की तरफ से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में यूपी के बिजनौर निवासी मौलाना अनवारूल हक और नईम काजमी के नाम हैं, उन्हें भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
कमलेश तिवारी की हत्या में दो लोग शामिल थे. उन्होंने पहले कमरे में चाय पी. हमलावर अपने साथ मिठाई के डिब्बे में बंदूक और चाकू लेकर पहुंचे थे. एक ने गला रेता और दूसरे ने गोली मार दी. कमलेश पर चाकू और बंदूक दोनों से वार किया गया. पुलिस को मौके से एक पिस्तौल भी मिली थी.
इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन किया है. एसआईटी में लखनऊ के आईजी एसके भगत, लखनऊ के एसपी क्राइम दिनेश पूरी और एसटीएफ के डिप्टी एसपी पीके मिश्रा शामिल हैं. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कमलेश तिवारी हत्याकांड में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से रिपोर्ट भी मांगी है.
गुजरात के सूरत से पकड़े गए तीन लोगों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पकड़े गए तीन संदिग्धों के नाम मौलाना मोहसिन शेख सलीम (24), फैजान (30) और खुर्शीद अहमद पठान (30) हैं. तीनों सूरत के रहने वाले हैं. डीजीपी ने बताया कि सुराग मिलने के बाद शुक्रवार को ही छोटी-छोटी टीमें गठित की गई थी. जांच में इस मामले के तार गुजरात से जुड़े होने का संकेत मिला. बाद में लखनऊ के एसएसपी और गुजरात पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले. ‑वेब
घर की छत पर बेकार चीजों से छह सीट वाला बनाया प्रायोगिक विमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने घर की छत पर बेकार चीजों से छह सीट वाला प्रायोगिक विमान बनाने वाले कैप्टन अमोल यादव से मुलाकात की। मुंबई के रहने वाले अमोल ने 18 सालों की मेहनत के बाद इस एयरक्राफ्ट को तैयार किया है।
पीएम ने कहा कि अमोल की कहानी उन लाखो युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो देश निर्माण में कुछ करना चाहते हैं। स्वदेशी एयरक्राफ्ट का नर्माण उनके धैर्य और दृढ़संकल्प की कहानी है। यह मेक इन इंडिया का शानदार उदाहरण भी है क्योंकि उन्होंने इसे बनाने में अपनी आवासीय इमारत की छत पर पड़ी चीजों का इस्तेमाल किया है।
अमोल को 2011 से नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से विमान को अनुमति मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके बारे में पता चलने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे पीएम मोदी के संज्ञान में लाया। जिन्होंने डीजीसीए को जल्द से जल्द युवा पायलट को अनुमति देने का निर्देश दिया। तीन दिन पहले ही कैप्टन अमोल को इस विमान को उड़ाने की मंजूरी मिली है। पीएम से मुलाकात के बाद अमोल ने प्रधानमंत्री को उनके सपना पूरा करने में मदद करने के लिए आभार जताया। ‑वेब

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