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यूं तो अपने लिए सभी जीते हैं …

Smt. Namrata Pandey, Kanpur

यूं तो अपने लिए सभी जीते हैं … लेकिन बात तो तब है जब आप दूसरों के लिए जिएं … और अपने जन्म को सार्थक करते हुए यानि अपने आपको तराश कर एक रत्न का रूप ले लेें और गरीबों के घर में रौशनी बिखेर कर अंधकार को मिटा दें।
उन्हीं चंद रत्नों में से एक अनमोल रत्न हैं श्रीमती नमृता पाण्डेय जो आज एक समाज सेविका के रूप में अपने निश्छल मन से लोगों की सेवा में अपने आपको समर्पित कर दिया है। प्रिय नम्रता जी ज्यादा से ज्यादा गरीब बच्चों की शिक्षा व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिये जिस तन्मयता से लगी रहती हैं उसके लिए उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाये वह कम है।
उनको आप विभिन्न भूमिकाओं में देख सकते हैं। कभी वो नमामि गंगे प्रकल्प भाजपा नेचर क्लब से जुड़कर गरीब बच्चों को चाॅकलेट, गुब्बारे व अन्य जरूरतों को सामान वितरित कर अपनी आभा बिखेरती हुए दिखाई देती हैं, कहीं वो गंगा को ’स्वच्छ और निर्मल’ रखने का संकल्प लेती हुई दिखाई देती हैं और कहीं वो क्लब द्वारा आयोजत ’सेवा दिवस’ में अपनी खुशबू बिखेरती हई नजर आती हैं। उनका इस प्रकार समर्पण भाव से कार्य करना अतुल्यनीय है। जिसका हम सभी लोग अभिनंदन करते हैं। — बीएसएन संवाददाता