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अपनी पूछ पर पैर पड़ा तो बौखलाया चीन

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भारत सहित दूसरे देशों के आंतरिक मामलों पर बयानबाजी करने वाला चीन अमेरिका के एक कदम से बौखला गया है. अब उसे अपने आंतरिक मामलों में किसी दूसरे देश की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं हो रही है. बीजिंग ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसे तिब्बत को हथियार बनाकर चीन पर निशाना साधना बंद करना चाहिए.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि अमेरिका तिब्बत को आधार बनाकर चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है. उसका यह कदम तिब्बत के विकास और स्थिरता के लिए भी खतरा है. लिहाजा अमेरिका को तुरंत यह सब बंद करना चाहिए.
अमेरिकी ने बुधवार को लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम मामलों के सहायक विदेशमंत्री रॉबर्ट डेस्ट्रो को तिब्बत मामले का विशेष समन्वयक नामित किया है. इस बात से चीन तिलमिलाया हुआ है. अमेरिका शिनजियांग और तिब्बत में मानवाधिकार हनन का मुद्दा पुरजोर ढंग से उठाता रहा है. डोनाल्ड ट्रंप अच्छे से जानते हैं कि ये चीन की कम्युनिस्ट सरकार की कमजोर कड़ी हैं. हालांकि, यह बात अलग है कि चीन सभी आरोपों से इनकार करता है. उसका कहना है कि तिब्बत में अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता है और अमेरिका बेवजह इस मामले को तूल दे रहा है.
इससे पहले, रॉबर्ट डेस्ट्रो की नियुक्त पर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि डेस्ट्रो चीन की कम्युनिस्ट सरकार और दलाई लामा के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के अमेरिकी प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, ताकि तिब्बत की विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की रक्षा की जा सके और उनके मानवाधिकार के प्रति सम्मान में सुधार किया जा सके. उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र तिब्बत को लेकर चीन की दमनकारी नीति से चिंतित है. ‑वेब