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पंजाब की दादी ने कंगना रनौत को दिया मुंहतोड़ जवाब …’असी की करणे ने 100 रुपये…’

किसान आंदोलन में शामिल पंजाब की दो दादियो के 80वें पड़ाव पर पहुंचने पर भी हौसले फीके नहीं पड़े है। वे किसानों के हक के लिए आवाज उठा रही हैं। सोशल मीडिया भी इन दादियों का आभार जता रहा है।
किसानों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। मंगलवार को केंद्र सरकार की तरफ से बुलाई गई मुलाकात के बाद भी सहमति नहीं बन सकी। लिहाजा अपना बोरिया-बिस्तर और राशन लिए किसान दिल्ली कूच के लिए बॉर्डर पर जुटे हुए हैं। इस आंदोलन में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर शामिल हुई हैं लेकिन पंजाब के किसान परिवार की दो दादी केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शन की पोस्टर वुमन बन गई हैं। ये दादी हैं- बठिंडा की मोहिंदर कौर और बरनाला की जंगीर कौर, दोनों उम्र के 80वें पड़ाव पर है लेकिन इस उम्र में भी वे अपने परिवार और बाकी किसानों के लिए आवाज उठाने के लिए झंडाबरदार बनी हुई है। दोनों दादियों को सोशल मीडिया पर भी हौसलाअफजाई हो रही है।
मोहिंदर की तस्वीर साझा कर तंज कसने पर ऐक्ट्रेस कंगना रनौत भी बुरी तरह ट्रोल हो गईं। दरअसल कंगना ने मोहिंदर को 82 साल की बिल्किस बानो समझकर ट्वीट किया था जो सीएए के खिलाफ शाहीन बाग आंदोलन का चेहरा थीं और टाइम मैगजीन ने उन्हें 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया था। कंगना ने ट्वीट किया था, ’यह वही दादी है जिन्हें टाइम मैगजीन ने मोस्ट पावर (फुल) बताया था और यह 100 रुपये में उपलब्ध हैं। पाकिस्तानी पत्रकारों ने शर्मनाक तरीके से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पीआर को हायर कर लिया है, हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो वैश्विक रूप से हमारे लिए बोलें।’
कंगना के ट्वीट का जवाब देते हुए मोहिंदर ने कहा कि उनके परिवार के पास पर्याप्त पैसा है। उन्होंने कहा, मैं पैसों के लिए आंदोलन में क्यों जाऊंगी ? बल्कि मैं तो दान करूंगी। मोहिंदर ने सितंबर महीने में अपने पति लाभ सिंह के साथ बादल गांव में कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा, ’अब मैं दिल्ली जाना चाहती हूं।’
वहीं दूसरी दादी बरनाला जिले के कट्टू गांव की जंगीर कौर हैं। 80 साल की जंगीर के पास एक एकड़ जमीन है। उन्हें भी इस उम्र में किसान आंदोलन में भागीदारी के लिए वाहवाही मिल रही है। जंगीर कहती हैं, ’मैं माटी के सपूतों का साथ देना चाहती हूं जो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। मैं चाहती हूं कि सरकार हमारी मांगों पर ध्यान दें ताकि हमें हमारी जमीन खोने का डर न हो।’ ‑वेब

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