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हरिद्वार महाकुंभ समापन के पश्चात आपस में भिड़े अखाड़े

निरंजनी अखाड़े ने अपनी तरफ से हरिद्वार महाकुंभ के 17 अप्रैल से समापन की घोषणा कर दी है। इसके बाद अखाड़े आपस में ही भिड़ गए हैं और निरंजनी अखाड़े से माफी मांगने के लिए कहा है। निर्वाणी अणि अखाड़ा के अध्यक्ष महंत धर्मदास ने कहा कि कुंभ मेले की समाप्ति की घोषणा का अधिकार केवल मेलाधिकारी या मुख्यमंत्री को है। निरंजनी अखाड़े ने बिना किसी सहमति के ऐसा कहकर समाज में अफरातफरी मचाने का अक्षम्य अपराध किया है और ऐसे में उसके साथ रहना मुश्किल है।
महंत धर्मदास ने कहा कि निरंजनी अखाड़े को अपने ऐसे बयान के लिए पूरे अखाड़ा परिषद के सामने माफी मांगनी चाहिए और तभी उसके साथ आगे बने रहने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उसका यह फैसला ठीक नहीं है क्योंकि कुंभ के बारे में कोई भी फैसला सभी 13 अखाड़े मिलकर लेते हैं। बड़ा उदासीन अखाड़े ने भी साफ किया कि वह जल्द महाकुंभ मेला समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। अखाड़े के अध्यक्ष महंत महेश्वर दास ने कहा कि बिना अखाड़ा परिषद की बैठक के महाकुंभ मेला समाप्त करने के बारे में कोई फैसला नहीं किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश से आए निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कपिल देव की कोराना की चपेट में आकर 13 अप्रैल को मौत हो चुकी है। हरिद्वार के मुख्य चिकित्साधिकारी शंभुकुमार झा ने बताया कि पांच अप्रैल से लेकर 14 अप्रैल तक कुंभ मेला क्षेत्र में 68 साधु संतों की जांच रिपोर्ट में उनके महामारी से पीड़ित होने की पुष्टि हो चुकी है। ‑वेब

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