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विदेशी मीडिया ने मोदी सरकार को किया कठघरे में खड़ा

कोरोना के लिए स्पेशल मेडिकल सेवाओं की बात तो छोड़िए भारत में लोगों को अस्पताल के बेड, ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं के लिए मारामारी करनी पड़ रही है। कोरोना से जान गई तो शमशान और कब्रिस्तान में भी जगह के लिए लड़ाई जैसा मंजर है। ऐसे में विदेशी मीडिया ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है-
अमेरिकी अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने 24 अप्रैल के अपने ओपिनियन में लिखा कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर की सबसे बड़ी वजह पाबंदियों में जल्द राहत मिलना है। इससे लोगों ने महामारी को हल्के में लिया। कुंभ मेला, क्रिकेट स्टेडियम जैसे इवेंट में दर्शकों की भारी मौजूदगी इसके उदाहरण हैं। एक जगह पर महामारी का खतरा मतलब सभी के लिए खतरा है। कोरोना का नया वैरिएंट और भी ज्यादा खतरनाक है।
ब्रिटेन के अखबार ‘द गार्जियन’ ने भारत में कोरोना बने भयानक हालात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को घेरा है। 23 अप्रैल को अखबार ने लिखा- भारतीय प्रधानमंत्री के अति आत्मविश्वास (ओवर कॉन्फिडेंस) से देश में जानलेवा कोविड‑19 की दूसरी लहर रिकॉर्ड स्तर पर है।
लोग अब सबसे बुरे हाल में जी रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड दोनों नहीं है। 6 हफ्ते पहले उन्होंने भारत को ‘वर्ल्ड फार्मेसी’ घोषित कर दिया, जबकि भारत में 1ः आबादी का भी वैक्सीनेशन नहीं हुआ था।
अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भारत के संदर्भ में 25 अप्रैल को लिखा कि साल भर पहले दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन लगाकर कोरोना पर काफी हद तक काबू पाया, लेकिन फिर एक्सपर्ट्स की चेतावनी की अनदेखी की गई। आज कोरोना के मामले बेकाबू हो गए हैं। अस्पतालों में बेड नहीं है। प्रमुख राज्यों में लॉकडाउन लग गया है। सरकार के गलत फैसलों और आने वाले मुसीबत की अनदेखी करने से भारत दुनिया में सबसे बुरी स्थिति में आ गया, जो कोरोना को मात देने में एक सफल उदाहरण बन सकता था।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने रविवार को कहा- इस मुश्किल वक्त में हम भारत के साथ खड़े हैं। भारत हमारा मित्र देश है और कोविड‑19 के खिलाफ इस जंग में हम उसका पूरा साथ देंगे।
भारत में मेडिकल ऑक्सीजन कैपेसिटी बढ़ाने के लिए फ्रांस और जर्मनी ने तैयारी कर ली है। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने इसे ‘मिशन सपोर्ट इंडिया’ नाम दिया है। उन्होंने कहा- महामारी से हम सब जंग लड़ रहे हैं।
फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका ने मुसीबत की घड़ी में भारत की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि महामारी की शुरुआत में भारत ने हमारे अस्पतालों में सहायता भेजी थी। अब जबकि उसे जरूरत है, तो हम मदद के लिए तैयार खड़े हैं। ‑वेब