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लखनऊ

कोरोनाः हकीकत और कागजी कार्यवाही में जमीन आसमान का अंतर

शहर में लगभग 90 फीसदी संक्रमितों ने घर पर रहकर ही इलाज किया। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के तहत बिना लक्षण वाले मरीज को संक्रमित होने के 10 दिन बाद ठीक होने वालों की सूची में जोड़ लिया जाता है। वहीं, लक्षण वाले मरीजों को 14 से 17 दिन बाद रिकवर माना जाता है। ऐसे में मरीज भले ही संक्रमित हो लेकिन रेकॉर्ड में ठीक हो जाता है।
पहली लहर के दौरान मरीज दस दिन में ठीक हो रहे थे और गाइडलाइन काम कर जाती थी। हालांकि दूसरी लहर में वायरस में बदलाव आया और मरीज लंबे समय तक कोविड के शिकार हो रहे हैं। यानी निगेटिव होने में 25 से 30 दिन तक लग रहे हैं। इसके बावजूद गाइडलाइन में बदलाव नहीं किया गया। इससे रिकवरी के आंकड़े बेहतर होने लगे।
विभाग के पास सही जानकारी की पूरी व्यवस्था है। कोविड कंट्रोल रूम से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक से होम आइसोलेशन के मरीज के पास रोज दो से तीन फोन जाते हैं। यानी मरीज का डेटा अपडेट होता है। ऐसे में अगर यह भी पूछा जाए कि रिपोर्ट निगेटिव हो चुकी है या नहीं तो सही डेटा मिल सकता है।
लोकबंधु अस्पताल के डॉ. रूपेंद्र ने बताया कि वर्तमान हालात में यह तय नहीं है कि दस दिन बाद मरीज ठीक हो जाएगा। कई बार घर जाने के बाद मरीजों की हालत खराब हो रही है। कई केस में देर से साइटोकाइन स्टॉर्म आ रहा है। ‑वेब

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