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मोदी सरकार की नाकामियां, चुकानी पड़ सकती है भारी कीमत

वैसे तो मोदी सरकार पर विपक्षी गुट कुछ खास प्रभाव डालते नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन सरकार में कुछ ऐसी नाकामियां दिख रही हैं जिसमें सुधार नहीं किया गया तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.
इंडिया टुडे के सर्वे के अनुसार अगर आज चुनाव कराया जाए तो नरेंद्र मोदी की सरकार अगले साल फिर से सत्ता में आ सकती है. लेकिन हकीकत में अभी चुनाव होने में करीब 8 महीने बचे हैं और जिस तरह से कमियां बनीं हुई हैं उससे उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ सकता है।
देश का मिजाज सर्वेक्षण में शामिल लोगों के बीच नरेंद्र मोदी सरकार की कमियों के बारे में राय मांगी गई तो उन्होंने रोजगार की कमी को सबसे बड़ी नाकामी बताया. इसके बाद लोगों ने राजमर्रा की कीमतों में वृद्धि, नोटबंदी, किसानों की आत्महत्या और कृषि संकट सरकार की अन्य सबसे बड़ी नाकामियों के रूप में गिनाया.
मोदी सरकार के लिए यह संतोषजनक हो सकता है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के प्रयास को मोदी की सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जाता है. सरकार को काले धन के खिलाफ कड़े एक्शन (16þ), भ्रष्टाचार मुक्त सरकार (15þ) और नोटबंदी (13þ) को मिलाकर 44 फीसदी का समर्थन मिला है.
इसके अलावा जीएसटी लाने, स्वच्छ भारत और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यक्रमों के लिए जहां मोदी सरकार की पीठ थपथपाई गई है, वहीं एनडीए सरकार की कई दूसरी योजनाओं को ठंडी प्रतिक्रिया मिली है जिनमें बहुत जोरशोर से प्रचारित जन धन योजना, डिजिटल इंडिया और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण शामिल हैं. महंगाई पर काबू पाने के बारे में सर्वे दिखाता है कि वे नाकाम रहे हैं और महंगाई ज्यादा बढ़ गई है।
जहां तक नोटबंदी का सवाल है तो यह सरकार के लिए आत्मघाती साबित हुई क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को लगता है कि इसने अनौपचारिक क्षेत्र को तबाह कर दिया. ऐसे लोगों की भी संख्या में खासी बढ़ी है जो यह मानते हैं कि नरेंद्र मोदी का ’अच्छे दिन’ का वादा बस एक चुनावी जुमला था. जनवरी 2017 में 24 फीसदी लोग ऐसा मानते थे, फिलहाल 43 फीसदी लोगों की प्रधानमंत्री के बारे में ऐसी ही धारणा बन चुकी है. -वेब

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