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संजय गांधी को पिट्स जैसे आक्रामक विमान उड़ाने से राजीव गांधी ने किया था मना:राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उड़ान के प्रति अपने चाचा को याद करते हुए संजय गांधी की विमान दुर्घटना में हुई मौत पर बड़ा रहस्योद्घाटन किया। राहुल ने कहा कि चाचा संजय गांधी मेरे पिता राजीव गांधी की बात मान लेते तो शायद हादसा न होता।
पिता ने अपने भाई संजय को पिट्स जैसे आक्रामक विमान उड़ाने से मना किया था, लेकिन वह नहीं माने। राहुल ने कहा, पायलट जब विमान उड़ाता है, उसकी कल्पनाशीलता रोड, रेलवे लाइन द्वारा अवरुद्ध नहीं होती। उनकी कल्पनाशीलता 30 हजार फुट पर होती है, इसलिए उनकी भी क्षमता बड़े तंत्र को देखने की है।
यूथ कांग्रेस की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इन्हीं चित्रों से जुड़ी यादों को साझा करते हुए राहुल ने एक वीडियो में परिवार से जुड़ी बातों को खुलासा किया।
राहुल ने कहा कि विमान उड़ाने का जितना अनुभव उनके पास है 300-350 घंटे, उतना ही चाचा संजय गांधी के पास भी था। संजय गांधी भी विमान उड़ाने के शौकीन थे और 23 जून, 1980 को एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। राहुल ने एक फोटो को देखकर बताया कि पिता अक्सर उन्हें कॉकपिट में बैठाते थे और तमाम सवालों का जवाब देते थे। राहुल ने कहा कि सोनिया गांधी कई बार पिता के प्लेन उड़ाने पर चिंतित हो जाती थीं। -वेब
नया वैरिएंट ‘म्यू’ पर विश्व स्वास्थ्य संगठन गंभीर
कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ‘म्यू’ पर चिंता जताते हुए डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि यह कई म्यूटेशन का जोड़ है। इस पर टीका बेअसर हो सकता है। यह वैरिएंट जनवरी, 2021 में पहली बार कोलंबिया में मिला था। इसका वैज्ञानिक नाम बी.1621 है। डब्ल्यूएचओ इस पर नजर बनाए हुए है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी पर अपने साप्ताहिक बुलेटिन में कहा कि ‘म्यू’ को ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह वैरिएंट कई म्यूटेशन का जोड़ है, जो टीके से बनी प्रतिरक्षा से बचने में कारगर है। इसका मतलब है कि इसके म्यूटेशन कोरोना के खिलाफ टीका लगवाने के बाद भी शरीर पर अटैक कर सकते हैं। संगठन ने कहा कि यह वैरिएंट अपना रूप बदल रहा है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे अध्ययन की जरूरत है।
कोरोना का म्यू वैरिएंट अब तक भारत में नहीं मिला है। इसके अलावा एक और म्यूटेशन सी.1.2 का कोई केस भी देश में नहीं आया है। भारत में वायरस के 232 से अधिक म्यूटेशन सामने आ चुके हैं। नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के डॉ. विनोद स्कारिया के मुताबिक म्यू (बी.1.621 और बी. 1.621.1) का एक भी मामला भारत में अब तक दर्ज नहीं हुआ है। देशभर में जीनोम सीक्वेंसिंग की निगरानी क रहे वैज्ञानिकों में से एक डॉ. स्कारिया ने कहा, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने म्यू वैरिएंट को गंभीर बताया है। अब तक मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि इस नए वैरिएंट में आनुवाशिंक परिवर्तन होते हैं। सामुदायिक प्रसार की क्षमता के कारण डेल्टा वैरिएंट की तरह ही यह आक्रामक हो सकते हैं। -वेब

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