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लखनऊ

आवास विकास परिषद में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा

आवास विकास परिषद में नया प्लॉट घोटाला सामने आया है। करोड़ों रुपये का यह फर्जीवाड़ा वर्षों पहले नीलाम हो चुके प्लॉटों के भुगतान की बैंक रसीदों के जरिए किया गया। पुरानी फाइलों से निकाली गईं इन रसीदों के जरिए लखनऊ स्थित वृंदावन योजना के एक कमर्शल प्लॉट की दर्जनों किस्तों का भुगतान दिखा दिया गया।
योजना के बाबू और अफसरों ने बैंकों से इसका सत्यापन भी नहीं करवाया कि रसीदें सही हैं या गलत। शुरुआती जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर आवास आयुक्त ने प्लॉट आवंटन निरस्त कर योजना के अफसरों और बाबुओं से 35 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी कर दिया है।
इस मामले में रिटायर्ड संपत्ति प्रबंधक डीके शुक्ला, रिटायर्ड कनिष्ठ लेखाधिकारी प्रमोद कुमार और वरिष्ठ सहायक केएन शुक्ला के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का आदेश भी हुआ। प्लॉट की नीलामी के वक्त इन तीनों के पास ही आवंटन पत्र जारी करने से लेकर भुगतान के सत्यापन की जिम्मेदारी थी। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद उप आवास आयुक्त नीलम की तरफ से 11 नवंबर को जांच का आदेश जारी किया गया। संयुक्त आवास आयुक्त (अनुशासनिक अनुभाग) को जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्हें एक महीने में रिपोर्ट सौंपनी है। आशंका जताई जा रही है कि वृंदावन योजना में 2017 से अक्टूबर 2021 तक कई आवासीय और कमर्शल प्लॉटों के भुगतान में ऐसा ही खेल हुआ है। इसके बाद उप आवास आयुक्त डॉक्टर अनिल कुमार ने इस अवधि में बेचे गए सभी आवासीय और कमर्शल प्लॉटों की जांच की सिफारिश कर दी है। ‑वेब

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